वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर से हलचल में तेजी हुई। सऊदी अरब के नेतृत्व में तेल उत्पादन को सीमित करने की प्रस्तावना को लेकर OPEC के अंतर्गत नए मतभेद को जन्म दिया है। अब अहम मामलों में दो प्रमुख सदस्य देशों के बीच टकराव का कारण बन चुका है। जिस वजह से वैश्विक तेल बाजार में संगठन की एकता पर उठने लगे सवाल।
बाजार में गिरावट रोकने के लिए उत्पादन घटाने की नीति
तेल उत्पादक देशों के लिए अक्सर उत्पादन को नियंत्रित करना, यह एक रणनीति बन जाती हैं। जब बाजार में तेल की आपूर्ति अधिक हो जाती है, तो कीमतों में भारी गिरावट आने लगती हैं। जब ऐसे स्थित में Saudi Arabia लंबे समय तक उत्पादन को घटाकर कीमतों को स्थिर रखने की नीति अपनाता रहा है।
ओपेक की तेल उत्पादन नीति पर साउथ अरब ओर यूएई के बीच बढ़ते मतभेद
खाड़ी क्षेत्रों के सहयोगी देशों के बीच सार्वजनिक असहमति तब सामने आई, जिस वक्त सयुक्त अरब अमीरात या सऊदी अरब तेल उत्पादन नीति को लेकर-आमने सामने आ गए। यह विवाद जिस ओपेक की योजना से जुड़ा है। जिसका उद्देश्य उत्पादन सीमा में बदलाव कर अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार को संतुलित करना है।
साउथ अरब में इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए प्रमुख भूमिका निभाई। योजना के अंतर्गत, अगस्त से दिसंबर 2021 के बीच प्रतिदिन लगभग 20 लाख बैरल तेल उत्पादन बढ़ाने का सुझाव दिया। इसके साथ ही, मौजूदा समय में उत्पादन कटौती को 2022 के अंत तक जारी रखने की बात कही गई, ताकी बाजार में तेल कीमतों की स्थिरता बनी रहे।
वहीं, सयुक्त अरब अमीरात ने इसी बीच प्रस्ताव पर अलग रुख अपनाया, जहां दोनों देशों के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आए। स्थिति को देखते हुए ओपेक के भीतर सदस्य देशों के हित अलग-अलग हो सकती हैं, यह घटनाक्रम अंतराष्ट्रीय तेल बाजार की जटिलता को उजागर करती हैं। उत्पादन, मांग और कीमतों के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन चुकी हैं।
खाड़ी देशों से जुड़ी 4 अहम अंतरराष्ट्रीय खबरें
- खाड़ी क्षेत्र में तेल उत्पादन को लेकर United Arab Emirates और saudi Arabia के बीच मनमुटाव सामने आया हैं। दोनों देशों से अलग-अलग दृष्टिकोण के कारण अहम मुद्दा चर्चा का बना हुआ है।
- स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए Saudi Arabia एक नए वायरस के खतरे के चलते United Arab Emirates कई हवाई उड़ानों को अस्थाई रूप से निकबित कर दिया है।
- Kuwait देश ने तेल संकट के चलते अपने आर्थिक संतुलन को बनाए रहने के लिए राहत कोष को बढ़ाकर लगभग 700 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया है, जोकि यह एक नया रिकॉड स्तर माना जा रहा है।
- अपनी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालने के प्रयास में Saudi Arabia नए राष्ट्रीय हवाई अड्डे को शुरू करने की योजना बना रहा हैं, जिसके चले पर्यटन और निवेश में विशेष बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
तेल उत्पादन कटौती से यूएई की आपत्ति और बाजार पर असर
UAE के तेल उत्पादन में कटौती को लेकर आपत्ति जताने पर स्पष्ट किया हे कि अप्रैल 2022 के बाद इस नीति को चाकू रखना उसके लिए उचित नहीं है। यूएई का मानना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए उत्पादन स्तर में बदलाव जरूरी है।
यूएई के अनुसार, महामारी के भीतर यात्रा और ऊर्जा खपत में गिरावट से कच्चे तेल की मांग और कीमतों में कमी दर्ज की गई थी। अब अंतरराष्ट्रीय बाजार धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है, बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन को बढ़ाना आवश्यक हो गया हैं।
दूसरी तरफ, OPEC के द्वार लागू की गई उत्पादन कटौती ने तेल की कीमतों को गिरने से अहम भूमिका निभाई। यदि उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ाया गया, तब तो ऊर्जा बाजार में संतुलित स्थिति बिगड़ सकती है और कीमतों में भारी अस्थिरता देखने को मिल रही हैं।
ओपेक समझौते पर यूएई और सऊदी अरब के बीच में बढ़ता मतभेद
रविवार के दिन CNBC के बातचीत के दौरान यूएई के ऊर्जा मंत्री सुहैल अल मजरूई ने साफ कहा कि उनके देश नेम तेल उत्पादन में कटौती करते दौरान सबसे बड़ा योगदान दिया है। उनके अनुसार, यूएई लगभग एक-तिहाई उत्पादन को जानबूझकर बंद रखा गया, जिससे आर्थिक दबाव में बढ़ोतरी देखी गई।
मजरूई ने स्पष्ट किया कि यूएई अब पुराने नियमों पर किसी नए समझौते को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। हर देश के अपनी परस्थितियों के कारण, निर्णय लेने होंगे और शर्तों पर चर्चा करने का पूरा अधिकार होना चाहिए। यही सबके लिए सही साबित हो सकता हैं।
तेल बाजार में संतुलन बनाए रखने पर सऊदी अरब का जोर
अब वहीं, सऊदी अरब ने तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए अब तक की सबसे बड़ी उत्पादन कटौती लागू की हैं। महामारी के प्रभाव को देखते ही सऊदी अरब ने उत्पादन बढ़ाने को लेकर अभी तक सावधानी बरत रहा है।
देश के ऊर्जा मंत्री ने सभी सदस्य देशों से अपील की है कि वे जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाए ‘समझदारी और संतुलन’ का पालन करें, ताकि अंतराष्ट्रीय तेल बाजारों में सावधानी बनी रहे।
ओपेक गठबंधक ओर वैश्विक तेल बाजार पर तेल का संकट
Saudi Arabia और United Arab Emirates के बीच यह मतभेद ओपेक गठबंधन के लिए चुनौती बन सकती हैं, अगर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकती तो, इसका सीधा असर तेल कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्थिति से बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकती है। जिसके कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर काफी हद तक प्रभाव बढ़ने की संभावना है। इसलिए आने वाले कुछ समय में इन देशों के बीच बातचीत और समझौता बेहद कुशल होगा।
ओपेक+ में सहमति, संतुलन और तेल कीमतों पर स्थिरता की चुनौती
प्रिंस अब्दुल अज़ीज़ बिन सलमान ने कहा कि पिछले कुछ 14 महीनों में किए गए प्रयासों तेल बाजार को स्थिरता आई है और इन्हें बनाए रखना जरूरी हैं। उन्होंने ‘संतुलता और तर्कसंगता’ से ही आगे बढ़ने का सही रास्ता है।
ईरान के ओपेक+ के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए उम्मीद जताई है कि कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास तक बनी रहेंगी। सयुक्त अरब अमीरात के रुख को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।
सयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के जुड़े रिश्तों में अब पहले जैसी एकरूपता नहीं बची। क्योंकि दोनों देश लंबे समय तक क्षेत्रीय मुद्दों पर साथ चल रहे है। लेकिन उनके राष्ट्रीय हित अब अलग दिशा में बढ़ रही हैं। यमन में सैन्य भागीदारी को लेकर यूएई का पीछे हटना याने की बड़ा संकेत माना जाता है।