ईरान में विरोध प्रदर्शनों की बढ़ती तीव्रता
अयातुल्ला अली खामेनेई सुप्रीम लीडर ने देश जारी सरकार से जुड़ा हुआ विरोधि प्रदर्शनों पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को लेकर ‘उपद्रवी’ को बताते हुए आरोप लगाया, बाहरी ताकतों खुश करने की आवश्यकपूर्ण जरूतर की जा रही हैं।
ईरान में पिछले कुछ दिनों से जारी प्रदर्शन अब और भयंकर रूप धारण कर लिया हैं। शुरुवात से चल रहे प्रदर्शन आर्थिक मुद्दों को लेकर शुरू हुए। लेकिन चलते समय के साथ राजनीतिक मांगें जुड़ती गई। अयातुल्ला खामेनेई ने हाली में अपना बयान साझा किया कि कुछ प्रदर्शनकारी ऐसे जोखिम भरे कदम उठाते है जो विदेशी नेताओं को प्रभावित करने का उद्देश्य हो सकता हैं।
ईरानी सरकार कहना है इस प्रदर्शनों के बीच विदेशी नेताओं की भूमिका हो सकती हैं, इसी बीच ईरान के सरकार ने सयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पत्र लिखकर अमेरिका पर सीधा आरोप किया, वह इन विरोधी प्रदर्शनकारियों को हिंसक दिशा और ले जाने का प्रयास कर रहे है। उसी वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति डोमाल्ट ट्रंप ने स्थिति के पड़ताल पर संकोच करते हुए ईरान इस गंभीर परिस्थितियों सामना कर रहे है।
ईरान के आर्थिक मुद्दों के बीच बढ़ता हुआ विरोध प्रदर्शन, यहां की हालत और वैश्विक प्रतिक्रिया
ईरान में चालू आर्थिक मुद्दों को लेकर चालू हुए विरोध प्रदर्शन ने लगातार 13वें दिन में आगमन कर लिया है। बीते वक्त के साथ प्रदर्शन ने व्यापक रूप ले चुका है और इसे वर्षों के सबसे बड़े आंदोलनों से गिना जा रहा हैं। कुछ मौजूदा लोग शासन व्यवस्था में बदलाव करने या उसे बहुत बनाने की मांग कर रहे हैं। या कुछ लोग पुरानी चालू राजनीतिक ढांचे को वापस लाने की बात कर रहे हैं।
मानवाधिकार की संगठनों की रिपोर्स के मुताबिक, इस प्रदर्शन से कई लोगों की जान चली गई है, इसमें आम नागरिक और कुछ सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे। इन आंकड़ों की गहनता से पुष्टि करना इस वक्त आसान नहीं है। इस विकट स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं को प्रतिबंध रूप से बंद कर दिया गया है। जिसके कारण सूचना प्रवाह कुछ समय के लिए खंडित हुआ है और बाहरी दुनिया से सटीक स्थिति की समझाना काफी मुश्किल हो गया है।
इसके बीच अंतरराष्ट्रीय मंच पर इन घटनाओं पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। अमेरिकी नेतृत्व का कहना है कि इन स्थितियों पर लगातार निगरानी कर रहे हैं और जरूरत होने पर उचित कदम उठाए जाएंगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया है कि इसका सीधा मतलब जमीन स्तर पर सेना भेजना नहीं।
Iran के बढ़ते हालात पर कड़ा बयान, वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता का रुख
ईरान में तेजी से बदलते हुए हालात को लेकर अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा है कि कुछ शहरों में जो घटनाएं देखने को मिल रही हैं, वे स्थिति अप्रत्याशित हैं। उनके मुताबित, कुछ ही हफ्तों पहले जो ऐसी स्थिति की कल्पना करना भी मुश्किल था, लेकिन अभी चल रहे हालत में बदलाव दिखाई दे रहा हैं।
इन घटनाओं के भीतर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ने ईरान की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए संकेत में बताया है कि अगर हालात और भी गंभीर रुख लेते हैं, तो उसके परिणाम कड़े हो सकते हैं। इन कठोर बयानों से यह सामने आया है कि ईरान में चल रहे घटनाक्रम अब वैश्विक चर्चा का विषय बन चुका है और बाहरी दुनिया से नजर बनाए हुए है।
ईरान के सर्वोच्च नेता का कड़ा सख्त संदेश
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने शुक्रवार को हाली में टेलीविजन पर प्रसारित संबोधन में फिर स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी दबाव के आगे बिल्कुल भी झुकने वाली नहीं। उन्होंने देश की मौजूदा परस्थिति पर कहा कि इस्लामी गणराज्य के लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद हुई है।
खामेनेई अपने संदेश में बताया कि देश की व्यवस्था बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण जोखिम उठाए जाएंगे और स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी रुख अपनाएगी।
विरोध प्रदर्शनों पर सख्त करवाई
देश के समर्थकों कौन संबोधित करते समय उन्होंने अपने बयान में दोहराया कि ईरानी “विनाशकारी तत्वों” पर करवाई करने में नरमी नहीं बरतेगा। यह बयान ऐसे समय में आया जिस वक्त देश के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। विश्लेषण मानते है कि यह सख्त करवाई नीति को दर्शाती है जिस वजह से साफ संदेश दिखाता है कि प्रशाशन की भी अस्थिरता को बर्दाश्त नहीं होंगा।
सयुक्त राष्ट्र पर ईरान की शिकायत
इसी दौरान में सयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजे गए एक पत्र में लिखा हुआ कि ईरान के प्रतिनिधि सयुक्त राज्य अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए जाए। इस पत्र में कहा गया कि अमेरिका ईरान के अतिरिक्त मामलों पर हस्तक्षेप कर रहा है ताकि वह जानबूझकर मुश्किलात पैदा करने की कोशिश कर सके। ईरान के राजदूत ने आरोप लगाया किसी तरह की गतिविधियों की स्थिरता और शांति के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।
ईरान में विरोध प्रदर्शनों का बढ़ता असर कायम
ईरान में 28 दिसंबर को शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने पूरे देशभर में तनावपूर्ण माहौल बना दिया है। विभिन्न रिपोर्ट्स के तहत, इन घटनाओं के भीतर कई नागरिकों की जान गई है, जबकि हजारों नागरिकों को हिरासत में लिया गया हैं। मानवाधिकार संगठनों ने कहा है कि विरोध के बाद कई हजारों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तारी किया लिया है, जिससे वह के हालात और तनावपूर्ण हो गए है।
मानवाधिकारी संगठनों के विभिन्न अकड़े और मीडिया प्रतिबंध
अंतराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक इन प्रदर्शनों में कई लोगों की मौत हुई है, जिसने कई छोटे बच्चे भी शामिल बताए जाते हैं। कई अलग-अलग रिपोर्ट्स के आंकड़ों में थोड़ा अंतर होने संभावना है। लेकिन स्थिति की गंभीरता सभी रिपोर्ट्स की गई जांच में दिखाई देती हैं।
वहीं, अंतराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों में ईरान के भीतर स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने की अनुमति नहीं है, क्योंकि यहां की जानकारी मुख्य रूप से बाहरी स्त्रोतों और परिवारों के बातचीत के आधार सही जानकारी को इकट्ठा कर रही है।
अंतराष्ट्रीय नेताओं की अपीत और सुझाव
दुनिया के कई देशों के प्रमुख नेताओं ने ईरान की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता वक्त की है। उनका कहना है कि किसी ओर देश की सरकार का कर्तव्य अपने नागरिकों के बीच सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। लोगों को बिना किसी भी डर के अपनी बात को सामने रखना और शांतिपूर्ण तरीके से एकजुट होने की अधिकार मिलना चाहिए।
सयुक्त राष्ट्र की चिंता और विशेष अपील
सयुक्त राष्ट्र ने इस स्थिति पर गहरी चिंता वक्त की है। संगठन के प्रति, जानमाल के नुकसान की घटनाएं बेहद चिंताजनक बनी हैं और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्योंकि उन्होंने यह भी पूरी तरह से स्पष्ट किया है कि दुनिया के हर व्यक्ति को शांतिपूर्ण विरोध करने का पूरा अधिकार है। सरकार की जिम्मेदारी के बदौलत अधिकारों की रक्षा करने और इसे सुनिश्चित करने जरूरत है।
ईरान की घरेलू सुरक्षा एजेंसियों के सख्त रुख
ईरान के घरेलू सुरक्षा से जुड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर कड़ा रुख अपनाया है। इस परिषदों में इसे लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिन्हें हालात बिगाड़ने और सुरक्षा के लिए खतरा माना जा रहा है। अधिकारियों ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हथियारों से लैस उपद्रवी होने का बताया है।
परिषद में स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) से अलग समझा जाना चाहिए। क्योंकि यहां के दोनों संस्थाओं की भूमिका अलग-अलग हैं। सरकारने बताया कि देश की कानून-व्यवस्था बनाई रखनी चाहिए और नगरिकों की सुरक्षा अनुरूदित करने के लिए जरूरी अहम कदम उठाना अनिवार्य है।
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